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संकटग्रस्त पादप जातियों के सूचीकरण

  • सर्वेक्षण, गवेषणा तथा पादपालय एवं साहित्य अध्ययन के आधार पर पुष्पी पौधों की लगभग 1500 जातियाँ और टेरिडोफाइट्स, बायोफ्राइट्स, लाइकेन एवं फंजाई की कुछ सौ की संकटग्रस्त के तौर पर पहचान की गई है। उनकी स्थिति व संकट की आशंकाओं के सावधानी गहन आकलन के बाद सर्वेक्षण ने 1182 जातियों के डाटा शीट के संकलन किए हैं। इनमे से 708 ‘रेड डाटा बुक आफ इण्डियन प्लांट्स खंड 1 - 3' (खंड 4, 5 प्रेस में हैं) के रुप में प्रकाशीत हुए हैं।
  • अपने ज्ञात इलाकों के साथ साथ समरुप पारि जलवायु अवस्था में अति दुर्लभ पादप जातियों के गहन खोज से बेलोसायनोप्सिस केवोंसिस, बिर्सोफाइलम टेट्रेड्रम, क्लेओजाइलन हिर्सुटम, डिडिमोकार्पस मिसिओनिस, डिडिमोकार्पस ओवोलिफोलिया, युजेनिआ फ्लोकोसाम यूजेनिया सिंगेम्पेटिएना, इक्जेकम कोर्टेलेसे, हम्बोल्टिया युनिजुगा, पोगोस्टेमन ट्रैवेंकोरिकम, केसिरिआ एंडेमेनिका, लेक्टुका कूपरी, केरेक्स पेमिरांसिस, सायथोपस सिक्किमेंसिस, डिक्रेनोस्टिगमा लेक्टुक्वाइडिस, कोटोनिएस्टर लैम्बर्टी, ट्रेकिकार्पस टेकिल, रेडुला एसेमिका, कोनोसिफेलम सुप्रेडिकोम्पोजिटम, डेडोलिओप्सिस पुर्पुरिआ, फिस्टुलिना हेपेटिका फिर से प्राप्त हुए है। इनमे से कुछ टाइप संग्रह के सौ वर्षो से अधिक बाद फिर से प्राप्त हुए है।
  • हाल में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय प्रायोजित शोध परियोजना के अन्तर्गत रेड डाटा बुक (1-5) मे तालिका बद्ध विरल टैक्सा के पुनर्वैधीकरण भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण द्वारा शूरु किये गये है। इससे अद्यतन आइ यू सी एन - 2001 श्रेणियों के अनुसार उनकी स्थिति के पुनरीक्षण होंगे।
  • सर्वेक्षण की मेघालय मे नेपेंथिस एवं साइट्रस जीन अभयारण्य तथा सिक्किम में रोडोडेंड्रन एवं आर्किड अभयारण्यों की स्थापना में भी योगदान है।

पिछला परिवर्तन : 17/11/2017