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उद्देश्य

प्राथमिक उद्देश्य

  1. सामान्यत: पूरे देश तथा विशेषत: संरक्षित क्षेत्रों, उत्तप्त, भंगुर पारितंत्र, नमभूमि, पावन वन आदि के पादप संसाधनों की विविधता के सूचिकरण एवं गवेषणा
  2. राष्ट्रीय, राज्य तथा जिला वलस्पतिजात के रूप में वनस्पतिजातीय विविधता का प्रलेखन; इनमें संरक्षित क्षेत्र, उत्तप्त स्थल, भंगुर पारितंत्र शामिल हैं।
  3. जैव विविधता में जो गुणात्मक तथा परिमाण मे अंतर आए उनके आकलन हेतु वनस्पतिजातीय विविधता की मानिटरिंग
  4. स्थानिक संकटग्रस्त एवं लुप्त प्राय जातियों के अभिनिर्धारण, उनके मानचित्र एवं उनके संख्या की गणना का अध्ययन तथा ऐसे लुप्तप्राय पारितन्त्र जिनके संरक्षण आवश्यक हैं
  5. परम्परागत एवं जैव तकनीकी प्रणाली से आशंका पूर्ण स्थिति में पहुँच चुके टैक्सा का वनस्पति उद्यान में पर स्थाने संरक्षण
  6. आर्थिक एवं नृवनस्पतीय महत्वपूर्ण पादप जातियों के संरक्षण एवं सतत उपयोग हेतु उनके सर्वेक्षण, संग्रह तथा अभिनिर्धाण
  7. उपरोक्त के साथ साथ पादपालय संग्रह (प्ररूप सहित) लिव (सजीव) संग्रह, पादप व्याप्ति आदि के राष्ट्रीय डाटाबेस तैयार करना

द्वितीयक (माध्यमिक) उद्देश्य

  1. पर्यावरण संघट्टन आकलन अध्ययन
  2. जन जातीय द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले औषोधीय पौधों के भेषज वैज्ञानिक अध्ययन
  3. निकट सम्बन्ध वाले टैक्सा के वर्गगत स्तर तथा टैक्सोनामिक स्थिति के निर्धारण हेतु अतिरिक्त डाटा के लिए जेवरसायनिक, पेलिनोलाजिकल एवं कोशिकीय अध्ययन
  4. जनता की जागरूकता के लिए संग्राहालयों में प्रदर्शित विभिन्न पादप उत्पादों के संग्रह एवं परिरक्षण
  5. निर्धारित क्षेत्रों में भू-वनस्पतीय अध्ययन
  6. जनता में पर्यावरण की जागरूकता के लिए कार्यक्रम, पर्यावरण की रक्षा और प्रदूषण नियंत्रण में पौधों की भूमिका के बारे में उन्हें शिक्षित करना

हाल मे भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण ने हरितोद्भिद, कबक एवं शैबाल (नील-हरित के अलावा) के अध्ययन हेतु 16 वें अभियान (1996-97) से अंटार्कटिका तक अपनी गतिविधि बढाई है।

पिछला परिवर्तन : 17/11/2017