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अवस्थिति संरक्षण

  • विभिन्न क्षेत्रिय मण्डलों के अपने वनस्पति उद्यानों की श्रृंखला के माध्यम से भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण पर स्थाने संरक्षण की दिशा में सक्रिय है। वे आर्किड, बाँस, ताड़, औषधीय पौधों, लेग्युम्स, पर्णांग, वन्य खाद्य पौधों कीटभक्षी पौधों, जिम्नोस्पम्र्स, आर्थिक महत्व की पादप जातियों के जर्मप्लाज्म के संग्रह, प्रवेशन, गुणन एवं रखरखाव में तत्पर हैं। लगभग 4000 देशी एवं बहुमूल्य आर्थिक विदेशी जातियों के लगभग 1,50,000 जीवित पौधे उगाये गये है। इनमें स्थानिक, विरल एवं संकट ग्रस्त श्रेणी की 200 से अधिक जातियाँ शामिल हैं। इन 200 जातियों में से कुछ कंवेंशन आन इंटरनेशनल ट्रेड इन इंडेंजर्ड स्पीसिज आफ वाइल्ड फॉना एण्ड फ्लोरा (सी आइ टी इ एस) के एपेंडिक्स क्ष्, क्ष्क्ष् में शामिल हैं; जैसे - रेनेंथेरा इम्स्कुटिएना, वेण्डा कोरुलिया, पेफिओपेडिलम जातियाँ, नेपेंथिस खासिएना, सौसुरिया कोस्टस, साइकस बेडोमी, बेंटिंकिआ कोंडेपेना, बेंटिंकिआ निकोबरिका, ट्रेकिकार्पस टेकिल, साइप्रिपिडियम जातियाँ, इरेमोस्टेकिस सुपर्बा, टैक्सस वालिचिएना, मिरिस्टिका अंडमेनिका, रॉवोल्फिआ सर्पेंटिना, डायोस्कोरिआ डेल्ट्वायडिया, पोडोफिलम हेक्सेंड्रम, साइथिया जातियाँ, सेरोपीजिया जातियाँ, फ्रेतिया इण्डिका, सेफेलोटेक्सस मैनी आदि।
  • कुछ विरल एवं बहुमूल्य विभूषक आर्किड जैसे पेफियोपेडिलम, वेण्डा कोरुलिआ, डेंड्रोबियम, सिम्बिडियम; कीट भक्षी नेपेंथिस खासियना; औषधीय पौधे जैसे - क्लेरोडेंड्रम कोलबुकिएनम, पेनेक्स स्युडोजिन्सेंग, लिट्सिआ क्यूबेबा, एक्विलेरिआ मेलेकेंसिस तथा लुप्त प्राय इरेमोस्टेकिस सुपर्बा का ऊतक संवर्धन से व्यापक गुणन शूरु किया गया है।
पिछला परिवर्तन : 17/11/2017